ऋषि खेती
नमस्कार
!
मैं आप लोगों
को एक किसान की
कहानी सुना रहा हूँ
जो एक समय खेती
छोड़ने का मन बना
चुका था। भारी भरकम
लागत लगाने के बाद भी
आशानुरूप कमाई ना हो रही थी। उसने एक जापानी
कृषि वैज्ञानिक की किताब पढ़ी।
उस वैज्ञानिक ने सुझाया था
कि आप बिना जुताई
खुदाई और बिना खाद,
बिना कीटनाशक के भी खेती
कर सकते हो। ये
आश्चर्यजनक है, लेकिन सच
है, बताते हैं कैसे?
उस वैज्ञानिक ने सुझाया कि
जब आप कोई भी
फसल उगाते हैं तो उसमें
कुछ भाग आपका होता
है और बाकी का
बचा हुआ भाग खेत
का होता है। वास्तव
में होता क्या है?
जब आप बची हुई
फसल का भाग खेत
को वापस कर देते
हैं तो उस खरपतवार
के नीचे ढेर सारे
कीड़े मकोड़े उत्पन्न हो जाते हैं।
जो खेती के लिए
लाभदायक होते हैं। कूड़ा
करकट और कीड़े मकोड़े
खेती के लिए खाद
एवं कीटनाशक का कार्य करते
हैं। उदाहरण के लिए, जैसे
हम धान की खेती
करते हैं, जब धान
की फसल तैयार हो
जाती है। तो हमें
धन निकाल लेना चाहिए और
बाकी का बचा हुआ
पुआल वापस खेत में
डाल देना चाहिए। इससे
बाद में। उर्वरक का
कार्य करता है। और
जब गेहूं की बुवाई करनी
हो तो जुताई करने
की जरूरत नहीं है। ऐसे
ही गेंहू की बुआई कर
दो, कुछ समय बाद गेहूं
उग आए तो आवश्यकतानुसार
बाहर से पानी दो,
फसल अच्छी होगी और ये
फसल स्वास्थ्य के लिए बहुत
अच्छी होगी क्योंकि इसमें
किसी प्रकार का ना तो
उर्वरक होगा ना ही
कीटनाशक।
आज कल उच्च बाजार
में जब आप देखेंगे
तो पाएंगे कि जो अनाज
आप जैविक खादों से उगाते हैं
उसकी बाजार में बहुत मांग
है और मूल्य भी सामान्य अनाज
से काफी ज्यादा है।
आज कल आप देखेंगे
कि बीमारियों का स्तर बढ़
गया है, जिसका सीधा
ताल्लुक हमारे खानपान से है। सभी
को पता है कि
हम फसल में यूरिया
कीटनाशक प्रयोग करते हैं। जब
हम जहर बोएंगे तो जहर
ही तो उगेगा |
मतलब सीधा है
कि हम जहर ही
खा रहे हैं तो
बिमारी नहीं होगी तो
क्या होगा? शहर वालों की
तो मजबूरी हैं, जो गांव
वाले उगाएंगे वो ही खाएंगे।
परन्तु हम गांव वाले
तो खुद ही उगाते
हैं और खुद वो
ही खाते हैं। अगर
आप चाहे तो कम
से कम अपने खाने
के लिए एसी फसल
उगा सकते हैं। जिसमे
खाद
एवं कीटनाशक ना हो। ये
आपके स्वास्थ्य के लिए काफी
लाभदायक सिद्ध होगा।
ऐसे
अनाज, फल, सब्जियों को
यदि हम बाजार में
बेचते हैं तो अच्छी
कीमत मिलेगी। हालाकी शुरुआत थोड़ी सी मुश्किल
है, परंतु आप विश्वास करो,
आप अच्छा करोगे | आपको जानकारी के लिए बता
दें, आजकल बहुत बड़ी
बड़ी कंपनियों ने इस प्रकार
की खेती करवाना शुरू
किया है।
उसे वो हर्बल बोलते
हैं।
उदाहरण
के लिए या प्रयोग
के तौर पर आप
कम से कम एक
या दो बीघा खेत
में सब्जियां उगाओ और ध्यान रहे कि इसमें
किसी भी प्रकार की
खाद या कीटनाशक का
प्रयोग नहीं करना चाहिए
केबल जैविक खाद जैसे गोबर, कूड़ा करकट को
सड़ाकर बनाते है, उसी का
प्रयोग करना चाहिए। फिर
शहर के ऐसे स्थान
पर जहाँ के लोग
इस तरह की फसलों
आप से खरीदे।
किसी
भी प्रोडक्ट्स को बेचने से
पहले उसका प्रचार करना
ज़रूरी है। जैसे आप
को बताना होगा कि हमारे
इस अनाज में सब्जी
में किसी भी प्रकार
का कोई उर्वरक एवं
कीटनाशक का प्रयोग नहीं
किया गया है। आप
इसको किसी संस्था से
सर्टिफाइड भी करा सकते
हैं। और उसके लाभ
भी आपको बताने चाहिए जैसे
स्वास्थ्य के लिए बहुत
अच्छा है। शुरुआत में
आपको भले ही उतना
मुनाफा ना मिले लेकिन
ये तो तय है
कि समय के साथ
आप बहुत अच्छा करेंगे।
कुछ नया सोचो जिससे
आपका ,समाज का, गांव
का और देश का
विकास होगा।
हम जिस किसान की बात कर
रहे थे, वो आज
खेती अपने ढंग से
कर रहा है, अच्छा
कमा रहा है। उसकी
इस तकनीक को सीखने के
लिए भी विदेशों से
लोग आ रहे हैं।
जो किसान खेती छोड़ने जा
रहा था वो आज
खेती करने की वजह
से दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
तो हमें भी इससे
सीख लेनी चाहिए और
इस दिशा में एक
सकारात्मक प्रयास करना चाहिए।
जय भारत। जय किसान।
सोच एक ग्रामवासी की
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